खेतों में बिजली पैदा करना चाहते हैं किसान  लेकिन इनके आवेदन एक साल से धूल खा रहे

 

उज्जैन। उज्जैन जिले सहित पूरे  प्रदेश के 1000 से अधिक किसान अपने खेतों में बिजली पैदा करना चाहते हैं, इसके लिए लाखों रुपए खर्च कर खेत तैयार किए, दस्तावेजों की कमी पूरी की और प्रधानमंत्री कुसुम योजना-ए के तहत आवेदन किए। लेकिन इनके आवेदन एक साल से धूल खा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें सोलर प्लांट लगवाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

जबकि उक्त योजना के तहत किसानों को 500 किलोवाट से लेकर 2 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्लांट लगवाने की स्वीकृति दी जानी थी। उक्त योजना का लक्ष्य है कि किसान अपने उपयोग की बिजली सोलर प्लांटों के जरिए खुद बनाएं और उपयोग के बाद भी यदि बिजली बचती है तो उसे बेचकर लाभ कमाए। यही नहीं, केंद्र सरकार सोलर प्लांट के जरिए बिजली पैदा कर कोयला आधारित बिजली के खतरों को कम करने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा भी देना चाहती है। वहीं किसानों के आरोप है कि अर्जा विकास निगम के अधिकारी उन्हें अनदेखा कर रहे हैं। जबकि कई बिल्डरों व उद्योगपतियों को लाभ दिए हैं। मप्र के एक बड़े समूह को 1500 मेगावॉट का प्रोजेक्ट दिया, लेकिन किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है।
किसानों का आरोप है कि शासन के नियमों के अनुरूप उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किए। फीस जमा की और जमीन को प्लांट लगाने के लिए तैयार भी कराया। इसमें कई रुपए खर्च किए गए। लेकिन ऊर्जा विकास निगम में एक साल से आवेदन पड़े हुए हैं। इन पर कोई विचार ही नहीं किया जा रहा है। किसानों को दपत्तरों के चक्कर लगवाए जा रहे। केंद्र सरकार की यह योजना किसानों की ऊर्जा की कमी की समस्या दूर कर सकती थी, लेकिन विभाग इसका लाभ दिलाने दिलचस्पी नहीं ले रहा।

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